जगन्नाथ जी की आंखें बड़ी बड़ी क्यों है

भगवान जगन्नाथ की मूर्ति अन्य हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों से अलग है. बड़ी-बड़ी आंखें, नाक में नथ और अधूरा शरीर. जगन्नाथ जी के इस अनोखे रूप के पीछे पौराणिक मान्यता प्रचलित है.

भगवान जगन्नाथ की बड़ी आंखें उनकी सर्वदर्शिता, ज्ञान, करुणा, और दया का प्रतीक मानी जाती हैं, जो कि सब कुछ देखती हैं

जगन्नाथ जी इन बड़ी आंखों से अपने भक्तों और उनकी भावन को जी भरकर देख सकें.

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने जब अपना शरीर छोड़ा, तो उनका अंतिम संस्कार किया गया. माना जाता है कि उनके शरीर के बाकी हिस्से तो पंचतत्वों में मिल गए, लेकिन, उनका दिल आज भी सुरक्षित है. यह भी माना जाता है कि उनका दिल भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में है और आज भी धड़कता है.

जगन्नाथ मंदिर में मूर्तियां नीम की लकड़ियों से बनी हैं. माना जाता है कि राजा इंद्रद्युम्न को सपने में श्रीकृष्ण ने नीम की लकड़ी से मूर्तियां बनाने का आदेश दिया था

जगन्नाथ जी को भात का महाभोग बेहद प्रिय है. पुरी में 7 मिट्‌टी के बर्तन एक के ऊपर एक रखकर इसमें भात चूल्हे पर पकाए जाते हैं. आश्चर्य की बात ये है कि सबसे ऊपर वाले बर्तन का भात सबसे पहले पकता है. ये भी अपने आप में रहस्य है.

पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून से शुरू होकर 5 जुलाई तक रहेगी

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