भक्ति के बिना जीवन अधूरा, आचार्य प्रदीप कुमार शुक्ल

*बिधूना के ग्राम बंथरा में चल रही श्री मद्भागवत कथा का भक्तों ने किया रसपान*

बिधूना – औरैया – ग्राम बंथरा में श्री मद भागवत कथा के सातवें दिन की कथा में आचार्य प्रदीप कुमार शुक्ल महाराज को आदित्य सेंगर उर्फ घंटू ने भगवताचार्य जी को पगड़ी एवम् माला पहनाकर स्वागत किया। जब भगवान श्रीकृष्ण ने देखा कि पृथ्वी का भार समाप्त हो चुका है, तब उन्होंने अपने धाम लौटने का विचार किया। यदुवंशियों में आपसी कलह उत्पन्न हुई और प्रभास क्षेत्र में उनका अंत हो गया। यह सब भगवान की इच्छा से हुआ ताकि पृथ्वी पर उनका कार्य पूर्ण हो सके।भगवान श्रीकृष्ण वन में पीपल के वृक्ष के नीचे विराजमान थे। उसी समय जरा नामक शिकारी ने उनके चरणों को हिरण समझकर बाण चला दिया। जब उसे अपनी भूल का पता चला तो वह अत्यंत दुखी हुआ। भगवान ने उसे क्षमा कर दिया और अपने परमधाम को प्रस्थान किया। मनुष्य को अहंकार और मोह का त्याग करना चाहिए।सत्संग और नामस्मरण से जीवन पवित्र होता है।भगवान के चरणों में प्रेम ही सच्चा सुख है। सात दिन तक कथा सुनने के बाद राजा परीक्षित का मन पूर्ण रूप से भगवान में लीन हो गया। तक्षक नाग के दंश से उनका शरीर छूट गया, लेकिन उन्होंने भगवद्भक्ति के प्रभाव से मोक्ष प्राप्त किया।

महामुनि शुकदेव जी ने बताया कि जो श्रद्धा और भक्ति से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे भगवान की कृपा प्राप्त होती है। कथा में सम्मिलित रहें।धर्मेंद्र सिंह सेंगर, सौरभ सिंह, आशुतोष शुक्ला, रोहित सेंगर, सुनील सिंह वैस , आदित्य सेंगर, मानस ठाकुर,आकाश चौहान, विकास चौहान, हर्ष सेंगर, अंकित सिंह, शिवा सेंगर, अतुल सिंह , विक्रम सिंह राठौड़ ( गुड़गांव) आदि लोग उपस्थित रहे।

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